Tere Kavan Kavan Gun Keh Keh Gaavan

Tere Kavan Kavan Gun Keh Keh Gaavan

Hukamnama ਤੇਰੇ ਕਵਨ ਕਵਨ ਗੁਣ ਕਹਿ ਕਹਿ ਗਾਵਾ ਤੂ ਸਾਹਿਬ ਗੁਣੀ ਨਿਧਾਨਾ
Place Darbar Sri Harmandir Sahib Ji, Amritsar
Ang 735
Creator Guru Ram Dass Ji
Raag Soohi
Date CE June 20, 2021
Date Nanakshahi ਹਾੜ ੬, ੫੫੩
Format JPEG, PDF, Text, MPEG(Audio)
Translations English, Hindi
Transliterations Punjabi, Hindi

English Translation

Suhi Mahala – 4 Ghar – 7 lk onkar satgur prasad
( Tere Kavan Kavan Gun Keh Keh Gaavan )
“By the· Grace of the Lord-Sublime, Truth personified & attainable through the Guru’s guidance.”

O, True Master! What virtues of Yours should I consider and sing Your praises, as You are the fountain-head of all virtues ? I cannot even describe a bit ofYour virtues and sing Your praises as You are the greatest power on Earth, the Lord-Creator and the purest and highest Master. (1)

O, Lord! I have only one support of Your True Name as my mainstay. O, True Master! There is no other protector for me except You, and! do not recognise anyone else except You. (Pause- 1)

O, my True Master! My (body) strength and power depends on Your support only, as I h~ve no other support. I always pray to You for all my requirements and needs, seeking Your help. O, Lord! I have no other support, my joy and sorrow is all linked up with You alone, being the cause and effect of everything, and my only support. (2)

O, Lord! This is Your greatest miracle that water and (Earth) and are existing together and it is only on land that water is to be seen (present), just as (fire) heat is present within the wood in a hidden form, and the goat and lion live together (in the jungle) though they are enemies of each other like the fire and wood. By watching this wonderful worldly drama, we try to deliberate in our mind and think of Your Greatness. O, my mind! Let us get rid of all our doubts and misgivings by remembering the Lord. (by reciting Lord’s True Name). (3)

O, saintly friends! Let us realise the greatness and benevolence of the Lord, by perceiving the praise and acclaim bestowed by the Lord on his saints and slaves (worshippers)! O, Nanak! The Lord has made the whole world bow at the lotus-feet of the holy saints, who are full of humility just as the Earth which lies below (at) our feet always, finally mingles the beings with itself (in dust) after their death. The whole world then pays obeisance to the holy saints, who are an embodiment of humility like the Earth (dust). (4- 1 – 12)

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Download HukamnamaDate: 20-06-2021

 

Hukamnama Darbar Sahib, Amritsar, SGGS 735
ਸੂਹੀ ਮਹਲਾ ੪ ਘਰੁ ੭ ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਤੇਰੇ ਕਵਨ ਕਵਨ ਗੁਣ ਕਹਿ ਕਹਿ ਗਾਵਾ ਤੂ ਸਾਹਿਬ ਗੁਣੀ ਨਿਧਾਨਾ ॥ ਤੁਮਰੀ ਮਹਿਮਾ ਬਰਨਿ ਨ ਸਾਕਉ ਤੂੰ ਠਾਕੁਰ ਊਚ ਭਗਵਾਨਾ ॥੧॥ ਮੈ ਹਰਿ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਧਰ ਸੋਈ ॥ ਜਿਉ ਭਾਵੈ ਤਿਉ ਰਾਖੁ ਮੇਰੇ ਸਾਹਿਬ ਮੈ ਤੁਝ ਬਿਨੁ ਅਵਰੁ ਨ ਕੋਈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥ ਮੈ ਤਾਣੁ ਦੀਬਾਣੁ ਤੂਹੈ ਮੇਰੇ ਸੁਆਮੀ ਮੈ ਤੁਧੁ ਆਗੈ ਅਰਦਾਸਿ ॥ ਮੈ ਹੋਰੁ ਥਾਉ ਨਾਹੀ ਜਿਸੁ ਪਹਿ ਕਰਉ ਬੇਨੰਤੀ ਮੇਰਾ ਦੁਖੁ ਸੁਖੁ ਤੁਝ ਹੀ ਪਾਸਿ ॥੨॥ ਵਿਚੇ ਧਰਤੀ ਵਿਚੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚਿ ਕਾਸਟ ਅਗਨਿ ਧਰੀਜੈ ॥ ਬਕਰੀ ਸਿੰਘੁ ਇਕਤੈ ਥਾਇ ਰਾਖੇ ਮਨ ਹਰਿ ਜਪਿ ਭ੍ਰਮੁ ਭਉ ਦੂਰਿ ਕੀਜੈ ॥੩॥ ਹਰਿ ਕੀ ਵਡਿਆਈ ਦੇਖਹੁ ਸੰਤਹੁ ਹਰਿ ਨਿਮਾਣਿਆ ਮਾਣੁ ਦੇਵਾਏ ॥ ਜਿਉ ਧਰਤੀ ਚਰਣ ਤਲੇ ਤੇ ਊਪਰਿ ਆਵੈ ਤਿਉ ਨਾਨਕ ਸਾਧ ਜਨਾ ਜਗਤੁ ਆਣਿ ਸਭੁ ਪੈਰੀ ਪਾਏ ॥੪॥੧॥੧੨॥

Hukamnama in Hindi

सूही महला ४ घर ७ ੴ सतगुर प्रसाद ॥ तेरे कवन कवन गुण कहि कहि गावा तू साहिब गुणी निधाना ॥ तुमरी महिमा बरन न साकउ तूं ठाकुर ऊच भगवाना ॥१॥ मै हर हर नाम धर सोई ॥ जिउ भावै तिउ राख मेरे साहिब मै तुझ बिन अवर न कोई ॥१॥ रहाउ ॥ मै ताण दीबाण तूहै मेरे सुआमी मै तुध आगै अरदास ॥ मै होर थाउ नाही जिस पहि करउ बेनंती मेरा दुख सुख तुझ ही पास ॥२॥ विचे धरती विचे पाणी विच कासट अगन धरीजै ॥ बकरी सिंघ इकतै थाइ राखे मन हर जप भ्रम भउ दूर कीजै ॥३॥ हरि की वडिआई देखहु संतहु हर निमाणिआ माण देवाए ॥ जिउ धरती चरण तले ते ऊपर आवै तिउ नानक साध जना जगत आण सभ पैरी पाए ॥४॥१॥१२॥

Hukamnama meaning in Hindi

Tere Kavan Kavan Gun Keh Keh Gaavan

राग सूही, घर ७ में गुरु रामदास जी की बाणी। अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा से मिलता है। मैं तेरे कौन कौन से गुण बता कर तेरी महिमा मँडन कर सकता हूँ ? तूँ सारे गुणों का खजाना है, तूँ सुब का मालिक है। हे सबसे ऊंचे भगवान! तूँ सुब का पालन करने वाला है । मैं तेरी बड़ाई बयान नहीं कर सकता ॥੧॥

हे हरी प्रभु! मेरे लिए तेरा नाम ही सहारा है। हे मेरे मालिक! जैसे तुझे अच्छा लगे उसी प्रकार मेरी रक्षा कर। तेरे बिना मेरा और कोई सहारा नहीं है॥१॥रहाउ॥ हे मेरे मालिक! तूँ ही मेरे लिए बल है, तूँ ही मेरे लिए सहारा है। मैं तेरे आगे ही विनती कर सकता हूँ। मेरे लिए अन्यत्र कोई ऐसी जगह नहीं, जहां विनती कर सकूँ। मैं अपना हर एक सुख हर दुःख तेरे पास ही पेश कर सकता हूँ॥२॥

हे मेरे मन! देख, (पानी के) बीच ही धरती है, (धरती के) बीच ही पानी है, लकड़ी में आग रखी हुई है, (मालिक प्रभु ने, मानो) शेर और बकरी एक जगह रखे हुए हैं। हे मन! (तूँ क्यों डरता है? ऐसी शक्ति वाले) परमात्मा का नाम जप कर तू अपने हरेक डर भ्रम दूर कर लिया कर॥३॥

हे संत जनों! देखो परमात्मा की बड़ी ताकत! परमात्मा उनको आदर दिलाता है, जिनकी कोई इज्ज़त नहीं करता था। हे नानक! जैसे धरती (मनुष्य के) पैरों के नीचे से (मौत आने पर) उस के ऊपर आ जाती है, उसी प्रकार परमात्मा सारे जगत को ला कर साधजनों के चरणों में डाल देता है॥४॥१॥१२॥

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