Har Siun Preet Antar Man Bedhia

Har Siun Preet Antar Man Bedhia

Hukamnama Darbar Sahib, Today: Har Siun Preet Antar Man Bedhia, Har Bin Rahan Na Jaayi; [ Raag Sorath Mahalla 4th, Guru Ramdas Ji, Ang 607 ]

Hukamnamaਹਰਿ ਸਿਉ ਪ੍ਰੀਤਿ ਅੰਤਰੁ ਮਨੁ ਬੇਧਿਆ
PlaceDarbar Sri Harmandir Sahib Ji, Amritsar
Ang607
CreatorGuru Ramdas Ji
RaagSorath
Date CEMay 18, 2022
Date NanakshahiJeth 5, 554
FormatJPEG, PDF, Text
TranslationsPunjabi, English, Hindi
TransliterationsNA

ਹਰਿ ਸਿਉ ਪ੍ਰੀਤਿ ਅੰਤਰੁ ਮਨੁ ਬੇਧਿਆ

ਅੱਜ ਦਾ ਹੁਕਮਨਾਮਾ, ਦਰਬਾਰ ਸਾਹਿਬ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ
ਸੋਰਠਿ ਮਹਲਾ ੪ ॥ ਹਰਿ ਸਿਉ ਪ੍ਰੀਤਿ ਅੰਤਰੁ ਮਨੁ ਬੇਧਿਆ ਹਰਿ ਬਿਨੁ ਰਹਣੁ ਨ ਜਾਈ ॥ ਜਿਉ ਮਛੁਲੀ ਬਿਨੁ ਨੀਰੈ ਬਿਨਸੈ ਤਿਉ ਨਾਮੈ ਬਿਨੁ ਮਰਿ ਜਾਈ ॥੧॥ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰਭ ਕਿਰਪਾ ਜਲੁ ਦੇਵਹੁ ਹਰਿ ਨਾਈ ॥ ਹਉ ਅੰਤਰਿ ਨਾਮੁ ਮੰਗਾ ਦਿਨੁ ਰਾਤੀ ਨਾਮੇ ਹੀ ਸਾਂਤਿ ਪਾਈ ॥ ਰਹਾਉ ॥ ਜਿਉ ਚਾਤ੍ਰਿਕੁ ਜਲ ਬਿਨੁ ਬਿਲਲਾਵੈ ਬਿਨੁ ਜਲ ਪਿਆਸ ਨ ਜਾਈ ॥ ਗੁਰਮੁਖਿ ਜਲੁ ਪਾਵੈ ਸੁਖ ਸਹਜੇ ਹਰਿਆ ਭਾਇ ਸੁਭਾਈ ॥੨॥ ਮਨਮੁਖ ਭੂਖੇ ਦਹ ਦਿਸ ਡੋਲਹਿ ਬਿਨੁ ਨਾਵੈ ਦੁਖੁ ਪਾਈ ॥ ਜਨਮਿ ਮਰੈ ਫਿਰਿ ਜੋਨੀ ਆਵੈ ਦਰਗਹਿ ਮਿਲੈ ਸਜਾਈ ॥੩॥ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਹਿ ਤਾ ਹਰਿ ਗੁਣ ਗਾਵਹ ਹਰਿ ਰਸੁ ਅੰਤਰਿ ਪਾਈ ॥ ਨਾਨਕ ਦੀਨ ਦਇਆਲ ਭਏ ਹੈ ਤ੍ਰਿਸਨਾ ਸਬਦਿ ਬੁਝਾਈ ॥੪॥੮॥

English Translation

Sorath Mahala- 4

( Har Siun Preet Antar Man Bedhia )

O, Lord! I cannot exist (live in peace) without Your presence within me (perceiving Your glimpse) as I am completely immersed in Your love and devotion. In fact, I would die ( a spiritual death) without reciting Your True Name, just as a fish faces death without the presence of water. (1)

O, True Master! May You bestow on me (bless me with) the boon of True Name through Your Grace! I am seeking Your True Name day and night so as to inculcate the love of True Name in my heart and enjoy the peace and tranquillity of mind. (Pause)

The Guru-minded person, who partakes of the nectar of True Name in a state of equipoise through the Guru’s guidance, gets acclaimed and honored (in the Lord’s presence) with a . purified mind. Just as a toad (Chatrik) pines and craves for the rain-drop and cannot satisfy his thirst without water. (from the rain-drop). (2)

The faithless persons are wandering in all ten directions in the absence of a True Name (being hungry), and undergo all sorts of sufferings. Such persons undergo the torture of the cycle of births and deaths and get Punished in the Lord’s court. (going through various forms of life). (3)

O, Nanak! The person, who is blessed with the Lord’s Grace, sings the praises of the Lord by partaking in the nectar of True Name. The helpless person gets his fire of worldly desires extinguished through the Guru’s Word when the Lord bestows His Grace on Him. ( 4-8)

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Download PDFDate: 18-05-2022

Hukamnama in Hindi

( Har Siun Preet Antar Man Bedhia )

सोरठि महला ४ ॥ हरि के प्रेम से मेरा मन बिंध गया है एवं हरि के बिना में रह नहीं सकता। जैसे मछली जल के बिना नाश हो जाती है, वैसे ही जीवात्मा हरि-नाम बिना मर जाती है॥ १॥

हे मेरे प्रभु! मुझे हरि-नाम रूपी कृपा-जल प्रदान कीजिए। मैं अपने मन में दिन-रात नाम ही माँगता रहता हूँ और नाम से ही शांति प्राप्त होती है॥ रहाउ ॥

जैसे पपीहा जल के बिना तड़पता रहता है और जल के बिना उसकी प्यास नहीं बुझती; वैसे ही गुरु के माध्यम से ही ब्रह्म रूपी जल का सुख प्राप्त होता है और वह प्रभु-प्रेम से सहज ही प्रफुल्लित हो जाता है॥ २ ॥

मोह-माया के भूखे मनमुख पुरुष दसों दिशाओं में भटकते रहते हैं और नाम से वंचित रहने के कारण अत्यंत दु:ख भोगते हैं। ऐसे लोग जन्मते-मरते रहते हैं, पुनः पुनः योनियों में आते हैं और भगवान के दरबार में उन्हें कठोर दण्ड मिलता है॥ ३॥

यदि भगवान कृपा करे तो मनुष्य हरि का गुणगान करता है और उसे हृदय में ही हरि-रस प्राप्त हो जाता है। हे नानक ! भगवान दीनदयालु है, जिस पर वह दयालु होता है, उसकी शब्द के माध्यम से तृष्णा बुझा देता है॥ ४॥ ८॥

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