Japji Sahib Hindi PDF | Free Download

Jap Ji Sahib Hindi PDF

Book Japji Sahib Hindi PDF
Writer Guru Nanak Dev Ji
Editor Guru Arjan Dev Ji
Pages 30
Language Hindi
Script Devnagari
Size 227 KB
Format PDF
Publisher Sikhizm.com [Public Domain]

Japji Sahib Hindi PDF is specially written for Hindi Knowing people usually pronouncing Gurbani with the wrong Maatraas. We have re-written the words of Japji Sahib for easy reading in the Devnagari Script. If you find any issues or mistakes with the file, please leave a comment below.

A sample of the text is given below:

धरम खंड का एहो धरम ॥ ज्ञान खंड का आखहो करम ॥ केते पवण पाणी वैसंतर केते कान्ह महेस ॥ केते बरमे घाड़त घड़ीअह रूप रंग के वेस ॥ केतीआ करम भूमी मेर केते केते धू उपदेस ॥ केते इंद चंद सूर केते केते मंडल देस ॥ केते सिध बुध नाथ केते केते देवी वेस ॥ केते देव दानव मुन केते केते रतन समुंद ॥ केतीआ खाणी केतीआ बाणी केते पात नरिंद ॥ केतीआ सुरती सेवक केते नानक अंत न अंत ॥३५॥Japji Sahib, Pauri 35th

Jap Ji Sahib Hindi PDF Text Sample 2

सो दर केहा सो घर केहा जित बह सरब समाले ॥ वाजे नाद अनेक असंखा केते वावणहारे ॥ केते राग परी सिओ कहीअन केते गावणहारे ॥ गावह तुहनो पौण पाणी बैसंतर गावै राजा धरम दुआरे ॥ गावह चित गुपत लिख जाणह लिख लिख धरम वीचारे ॥ गावह ईसर बरमा देवी सोहन सदा सवारे ॥ गावह इंद इदासण बैठे देवतेआ दर नाले ॥ गावह सिध समाधी अंदर गावन साध विचारे ॥ गावन जती सती संतोखी गावह वीर करारे ॥ गावन पंडित पड़न रखीसर जुग जुग वेदा नाले ॥

गावह मोहणीआ मन मोहन सुरगा मछ पयाले ॥ गावन रतन उपाए तेरे अठसठ तीरथ नाले ॥ गावह जोध महाबल सूरा गावह खाणी चारे ॥ गावहे खंड मंडल वरभंडा कर कर रखे धारे ॥ सेई तुधनो गावह जो तु भावन रते तेरे भगत रसाले ॥ होर केते गावन से मै चित न आवन नानक क्या वीचारे ॥ सोई सोई सदा सच साहिब साचा साची नाई ॥ है भी होसी जाए न जासी रचना जिन रचाई ॥ रंगी रंगी भाती कर कर जिनसी माया जिन उपाई ॥ कर कर वेखै कीता आपणा जिव तिस दी वडिआई ॥ जो तिस भावै सोई करसी हुकम न करणा जाई ॥ सो पातसाहो साहा पातसाहिब नानक रहण रजाई ॥२७॥Japji Sahib, Pauri 27th

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